🪔 बाबा गोरखनाथ जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Print Friendly, PDF & Email
5/5 - (1 vote)

बाबा गोरखनाथ जी की आरती (हिंदी), gorakhnath ki aarti –

जय गोरख देवा,
जय गोरख देवा ।
कर कृपा मम ऊपर,
नित्य करूँ सेवा ॥
शीश जटा अति सुंदर,
भाल चन्द्र सोहे ।
कानन कुंडल झलकत,
निरखत मन मोहे ॥

गल सेली विच नाग सुशोभित,
तन भस्मी धारी ।
आदि पुरुष योगीश्वर,
संतन हितकारी ॥

नाथ नरंजन आप ही,
घट घट के वासी ।
करत कृपा निज जन पर,
मेटत यम फांसी ॥

रिद्धी सिद्धि चरणों में लोटत,
माया है दासी ।
आप अलख अवधूता,
उतराखंड वासी ॥

अगम अगोचर अकथ,
अरुपी सबसे हो न्यारे ।
योगीजन के आप ही,
सदा हो रखवारे ॥

ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा,
निशदिन गुण गावे ।
नारद शारद सुर मिल,
चरनन चित लावे ॥

चारो युग में आप विराजत,
योगी तन धारी ।
सतयुग द्वापर त्रेता,
कलयुग भय टारी ॥

गुरु गोरख नाथ की आरती,
निशदिन जो गावे ।
विनवित बाल त्रिलोकी,
मुक्ति फल पावे ॥

बाबा गोरखनाथ जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Baba Goraknath Ji Ki Aarti, Hindi (English Lyrics) –

Jai Gorakh Deva,
Jai Gorakh Deva ।
Kar Krpa Mam Upar,
Nity Karoon Seva ॥
Sheesh Jata Ati Sundar,
Bhaal Chandr Sohe ।
Kanan Kundal Jhalkat,
Nirkhat Man Mohe ॥

Gal Seli Vich Naag Sushobhit,
Tan Bhasmi Dhari ।
Aadi Purush Yogishwar,
Santan Hitkari ॥

Nath Naranjan Aap Hi,
Ghat Ghat Ke Vasi ।
Karat Krpa Nij Jan Par,
Metat Yam Phansi ॥

Riddhi Siddhi Charnon Mein Lotat,
Maya Hai Dasi ।
Aap Alakh Awadhuta,
Utrakhand Vasi ॥

Agam Agochar Akath,
Arupi Sabse Ho Nyare ।
Yogijan Ke Aap Hi,
Sada Ho Rakhware ॥

Brahma Vishnu Tumhara,
Nishdin Gun Gave ।
Narad Sharad Sur Mil,
Charnan Chit Lave ॥

Charo Yug Mein Aap Virajat,
Yogi Tan Dhari ।
Satyug Dwapar Treta,
Kalyug Bhay Tari ॥

Guru Gorakh Nath Ki Aarti,
Nishdin Jo Gave ।
Vinvit Baal Triloki,
Mukti Phal Pave ॥

https://shriaarti.in/

बाबा गोरखनाथ जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

Jai Gorakh Deva – Victory to Lord Gorakh!

Kar Krpa Mam Upar – Shower your grace upon me.

Nity Karoon Seva – I continuously serve you.

Sheesh Jata Ati Sundar – Your matted hair is extremely beautiful.

Bhaal Chandr Sohe – Your forehead shines like the moon.

Kanan Kundal Jhalkat – Your earrings and ear ornaments sparkle.

Nirkhat Man Mohe – My mind is captivated by your divine form.

Gal Seli Vich Naag Sushobhit – A serpent adorns your neck gracefully.

Tan Bhasmi Dhari – You wear ashes on your body.

Aadi Purush Yogishwar – You are the primordial being and the Lord of Yogis.

Santan Hitkari – You work for the welfare of your devotees.

Nath Naranjan Aap Hi – You are the Lord Naranjan Himself.

Ghat Ghat Ke Vasi – You reside in every heart.

Karat Krpa Nij Jan Par – You bestow your grace upon your devotees.

Metat Yam Phansi – You liberate them from the noose of death.

Riddhi Siddhi Charnon Mein Lotat – Prosperity and success are at your feet.

Maya Hai Dasi – Maya (illusion) is your servant.

Aap Alakh Awadhuta – You are the unseen and renunciant.

Utrakhand Vasi – You reside in the region of Uttarakhand.

Agam Agochar Akath – You are beyond comprehension, perception, and description.

Arupi Sabse Ho Nyare – You are formless and distinct from everything.

Yogijan Ke Aap Hi – You are the Lord of Yogis.

Sada Ho Rakhware – You are the eternal protector.

Brahma Vishnu Tumhara – Brahma and Vishnu are your manifestations.

Nishdin Gun Gave – They sing your praises day and night.

Narad Sharad Sur Mil – Narada, Sharada, and other celestial beings meet you.

Charnan Chit Lave – Their minds are captivated by your feet.

Charo Yug Mein Aap Virajat – You manifest in all four ages (Yugas).
Yogi Tan Dhari – You assume the form of a Yogi.

Satyug Dwapar Treta – In the Satya, Dwapara, and Treta Yugas.

Kalyug Bhay Tari – You dispel fear in the age of Kali.

Guru Gorakh Nath Ki Aarti – This is the aarti of Guru Gorakh Nath.

Nishdin Jo Gave – Whoever sings it day and night.

Vinvit Baal Triloki – The innocent child of the three worlds.

Mukti Phal Pave – Attains the fruit of liberation.

बाबा गोरखनाथ जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

जय गोरख देवा – गोरख भगवान की जय!

कर कृपा मम उपर – मुझ पर अपनी कृपा बरसाओ।

नित्य करूं सेवा – मैं निरंतर आपकी सेवा करता हूं।

शीश जटा अति सुंदर – आपके जटा अति सुंदर हैं।

भालचंद्र सोहे – तुम्हारा माथा चाँद की तरह चमकता है।

कानन कुण्डल झलककट – आपके झुमके और कान के आभूषण जगमगाते हैं।

निर्खत मन मोहे – मेरा मन आपके दिव्य रूप से मोहित है।

गल सेलि विच नाग सुशोभित – एक नाग आपके गले को सुशोभित करता है।

तन भस्मी धारी – आप तन पर भस्म धारण करते हैं।

आदि पुरुष योगीश्वर – आप आदि पुरुष और योगियों के स्वामी हैं।

संतान हितकारी – आप अपने भक्तों के कल्याण के लिए कार्य करते हैं।

नाथ नारंजन आप ही – आप स्वयं नारंजन भगवान हैं।

घाट घाट के वासी – आप हर दिल में बसते हैं।

करत कृपा निज जन पर – आप अपने भक्तों पर अपनी कृपा करते हैं।

मेटत् यम फंसी – आप उन्हें मृत्यु के फंदे से मुक्त करते हैं।

रिद्धि सिद्धि चारणों में लोटाट – समृद्धि और सफलता आपके चरणों में है।

माया है दासी – माया तेरी दासी है।

आप अलख अवधूत – आप अदृश्य और त्यागी हैं।

उत्तराखंड वासी – आप उत्तराखंड के क्षेत्र में निवास करते हैं।

अगम अगोचर अकथ – आप समझ, धारणा और विवरण से परे हैं।

अरूपी सबसे हो न्यारे – आप निराकार हैं और हर चीज से अलग हैं।

योगीजन के आप ही – आप योगियों के देव हैं।

सदा हो रखवारे – आप शाश्वत रक्षक हैं।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा – ब्रह्मा और विष्णु आपके रूप हैं।

निशदीन गुन दिया – दिन रात तेरे गुण गाते हैं।

नारद शरद सुर मिल – नारद, शारदा, और अन्य दिव्य प्राणी आपसे मिलते हैं।

चरणन चित लावे – उनके मन आपके चरणों से मुग्ध हैं।

चारो युग में आप विराजत – आप चारों युगों (युगों) में प्रकट होते हैं।
योगी तन धारी – आप योगी का रूप धारण करते हैं।

सतयुग द्वापर त्रेता – सत्य, द्वापर और त्रेता युगों में।

कलयुग भय तारी – आप कलियुग में भय को दूर करते हैं।

गुरु गोरख नाथ की आरती – यह गुरु गोरख नाथ की आरती है।

निशदीन जो दिया – जो कोई इसे दिन रात गाता है।

विन्वित बाल त्रिलोकी – तीनों लोकों की मासूम संतान।

मुक्ति फल पावे – मुक्ति का फल प्राप्त करता है।

हिंदी आरती संग्रह देखे – लिंक

परिचय

बाबा गोरखनाथ जी की आरती उनके भक्तों के द्वारा प्रार्थना का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह आरती उनकी पूजा के दौरान गाई जाती है और उनके विशेषाधिकार को पुष्टि करती है। इस लेख में हम बाबा गोरखनाथ जी की आरती के बारे में विस्तार से जानेंगे। हम इस आरती के महत्व, मंत्रों को समझेंगे, और इसका उच्चारण करने के लिए आवश्यक विधि और सामग्री के बारे में चर्चा करेंगे।

आरती का महत्व

बाबा गोरखनाथ जी की आरती उनके भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह आरती उनकी पूजा और उनके दिव्य आध्यात्मिक संदेश के साथ जुड़ी हुई है। इसके माध्यम से, भक्त बाबा गोरखनाथ जी की कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं। आरती में उनकी महिमा, वीरता, और दयालुता का वर्णन किया जाता है। इसका उच्चारण भक्तों को एक ऊर्जा और शांति का अनुभव कराता है।

आरती के मंत्र

यहां हम बाबा गोरखनाथ जी की आरती के मंत्र प्रस्तुत कर रहे हैं:

ॐ नमो भगवते गोरखनाथाय नाथाय।

हे महायोगी, भगवान गोरखनाथाय, हम आपको नमस्कार करते हैं।

त्रिलोकी पालक, सब जगत के गुरु, गोरखनाथा महाराज की जय।

शंकर सर्वेश्वर, महाकाल, गोरखनाथा महाराज की जय।

अद्या करिष्यामि दीपाराधनाम्। गोरखनाथा महाराज की जय।

आरती की विधि और सामग्री

बाबा गोरखनाथ जी की आरती को आप निम्नलिखित विधि के अनुसार कर सकते हैं:

  1. सबसे पहले, आपको एक सुगंधित और शुद्ध मंदिर या पूजा स्थल तैयार करना चाहिए।
  2. आरती के लिए आपको बाबा गोरखनाथ जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठना चाहिए।
  3. अपने हाथों में एक दीपक लेकर, आपको उसे धूप और सुगंधित तेल से जलाना चाहिए।
  4. उठाते हुए दीपक को आपके देवता की ओर मोड़ें और बाबा गोरखनाथ जी के लिए आरती का उच्चारण शुरू करें।
  5. आरती के दौरान, आप बाबा गोरखनाथ जी की महिमा, उनकी कृपा, और उनके गुणों की प्रशंसा कर सकते हैं।
  6. आरती के बीच-बीच में आप धूप और फूलों का आरपी देवता की ओर उठाकर दे सकते हैं।
  7. आरती के समापन में, आप दीपक को देवता की ओर मोड़ कर चला सकते हैं।
  8. सभी प्रार्थनाएँ करने के बाद, आप अपनी श्रद्धा और भक्ति से बाबा गोरखनाथ जी को धन्यवाद दे सकते हैं।

समापन

बाबा गोरखनाथ जी की आरती एक प्रभावशाली प्रार्थना है जो उनके भक्तों को आत्मिक शांति, संतुलन और समृद्धि प्रदान करती है। इस आरती के माध्यम से, हम उनकी प्राप्ति के लिए अनन्य भक्ति और आराधना का अभ्यास करते हैं। यह आरती हमें आंतरिक स्थिरता, मानसिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करती है।

महत्वपूर्ण प्रश्न –

बाबा गोरखनाथ जी कौन हैं?

बाबा गोरखनाथ जी भारतीय पौराणिक कथाओं में महत्वपूर्ण हैं। वे नाथ संप्रदाय के प्रमुख संस्थापक माने जाते हैं और आध्यात्मिक जगत के मार्गदर्शक के रूप में पूजे जाते हैं।

बाबा गोरखनाथ जी की आरती कब की जाती है?

बाबा गोरखनाथ जी की आरती दैनिक पूजा और आराधना के दौरान की जाती है। बहुत से भक्त इसे प्रातः और सायंकालीन पूजा के समय भी करते हैं।

क्या यह आरती सभी लोग कर सकते हैं?

हाँ, बाबा गोरखनाथ जी की आरती को कोई भी कर सकता है जो उनके भक्त या आराधक हैं। इसके लिए किसी विशेष धर्म या जाति की आवश्यकता नहीं होती है।

बाबा गोरखनाथ जी की आरती का लाभ क्या है?

बाबा गोरखनाथ जी की आरती करने से भक्तों को शांति, सुख, समृद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। यह आरती उनकी कृपा को प्राप्त करने और भक्ति में स्थिरता को बढ़ाने का एक मार्ग प्रदान करती है।

क्या हम बाबा गोरखनाथ जी की आरती को संगठित रूप में प्राप्त कर सकते हैं?

हाँ, आप बाबा गोरखनाथ जी की आरती को आपके स्थानीय मंदिरों, नाथ समाज के धार्मिक स्थानों, या इंटरनेट पर उपलब्ध आरती संग्रह से प्राप्त कर सकते हैं। यह आपकी आसानी के लिए अनुकूल होगा।

Leave a Comment