🪔 श्री सूर्य देव जी की ३ आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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श्री सूर्य देव जी की ३ आरती (हिंदी), surya dev ji ki aarti lyrics –

आरती - १ 

जय कश्यप नन्दन, ऊँ जय अदिति नन्दन।
द्दिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ऊँ जय….

जय सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ऊँ जय….

जय सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ऊँ जय….

जय सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ऊँ जय…

जय कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ऊँ जय…

जय नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ऊँ जय…

जय सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ जय ..

आरती - २ 

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

आरती - ३ 

जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता।
षटपद मन मुदकारी, हे दिनमणि दाता॥

जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

नभमंडल के वासी, ज्योति प्रकाशक देवा।
निज जन हित सुखरासी, तेरी हम सबें सेवा॥

करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी।
निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी॥

हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

🪔 श्रीदेवी जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Surya Dev Ji Ki ३ Aarti, Hindi (English Lyrics) –

Aarti - 1 

Om, jai kashyapa nandana, prabhu, jai aditi nandan l
tribhuvana timira nikandana, bhakta hridaya candan ll. Om, jai …

sapta ashva ratha rajati, eka cakra dhari l
dukhahari sukhakari, manasa mala hari ll Om, jai

Sura muni bhusura vandita, vimala vibhava-shali l
aghadala dalana, divakara, divya kirana mali ll Om, jai …

Sakala sukarma prasavita, Savita subha kari l
vishva vilocana mocana, bhava bandhana bhari ll Om, jai …

Kamala samuha vikashaka, nashaka traya tapa l
sevata sahaja rahata ati, manasija santapa. ll Om, jai …

Netra vyadhi hara, suravara, bhu pira hari l
vrishti vimocana santata, parahita vrata dhari ll Om, jai …

Suryadeva, karuna-kara, aba karuna kije l
hara ajnana moha saba, tattva-jnana dije ll Om, jai …

Aarti - 2

Om Jai Surya Bhagwan

Jai Ho Tinkar Bhagwan

Jagat Ke Netra Swaroopa

Tum Ho Triguna Swaroopa

Dharata Sabahi Sab Dhyan

Om Jai Surya Bhagwan…

Sarathi Arun Hai Prabhu Tum

Shweta Kamaladhari

Tum Char Bhuja Dhari

Ashwa Hai Saath Tumharey

Koti Kirana Pasaarey

Tum Ho Dev Mahan

Om Jai Surya Bhagwan….

Usha Kaal Mein Jab Tum

Udaya Chal Aatey

Tab Sab Darshan Paatey

Phailaatey Ujiaara

Jaagta Tab Jag Saara

Karey Tab Sab Gun Gaan

Om Jai Surya Bhagwan ….

Bhoochar Jalchar Khechar

Sab Ke Ho Pran Tumhi

Sab Jeevo Ke Pran Tumhi

Ved Puraan Bhakhaaney

Dharm Sabhi Tumhe Maaney

Tum Hi Sarva Shaktimaan

Om Jai Surya Bhagwan….

Pujan Karti Vishayein

Pujey Sab Ek Paar

Tum Bhuvno Ke Pratipaal

Rituyein Tumhari Daasi

Tum Shashaka Avinashi

Shubhkari Anshumaan

Om Jai Surya Bhagwan….

Aarti - 3

Jai Jai Jai Ravidev Jai Jai Jai Ravidev

Rajanipati Madhaari Shatlad Jeevan Daata

Patpad Mann Madukaari Hey Dinmann Daataa

Jag Ke He Ravidev Jai Jai Jai Swadev

Nabh Mandal Ke Vaani Jyoti Prakaashak Deva

Nijjan Hit Sukhraashi Teri Hum Sab Sevaa

Karte Hai Ravi Dev Jai Jai Jai Ravidev

Kanak Badan Man Mohit Ruchir Prabha Pyari

Nit Mandal Se Mandit Ajar Amar Chavidhaari

Hey Survar Ravidev Jai Jai Jai Ravidev

https://shriaarti.in/

श्री सूर्य देव जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

“Om, victory to the son of Kashyapa, Lord, victory to the son of Aditi,
who dispels the darkness of the three worlds, and is the sandalwood fragrance in the hearts of devotees.”

“Om, victory to the one who rides the seven horses and chariot, and holds the discus,
who removes sorrows and brings happiness, and removes the impurities of the mind.”

“Om, victory to the one worshipped by gods, sages, and demons,
who possesses pure and glorious manifestations, who destroys the darkness of ignorance like the sun, and wears divine rays as a garland.”

“Om, victory to the one who creates all good actions, who bestows auspiciousness like the Sun,
who has eyes that see the entire universe, and releases from the bondage of worldly existence.”

“Om, victory to the one who makes the cluster of lotus blossoms visible,
who destroys the three types of afflictions, and naturally resides within, alleviating the suffering of the mind.”

“Om, victory to the remover of eye diseases, the best among the gods, and the reliever of earth’s burdens,
who continuously showers rain, and holds the vow to protect and benefit others.”

“O Sun God, the compassionate one, please show your mercy,
remove all ignorance and delusion, and grant the knowledge of the truth.”

श्री सूर्य देव जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

“ओम, कश्यप के पुत्र की जय, भगवान, अदिति के पुत्र की जय,
जो तीनों लोकों के अंधकार को दूर करते हैं, और भक्तों के हृदय में चंदन की सुगंध हैं।”

“ओम, सात घोड़ों और रथ की सवारी करने वाले और चक्र धारण करने वाले की जय हो,
जो दु:खों को दूर करके सुख देता है और मन के मैल को दूर करता है।”

“ओम, देवताओं, संतों और राक्षसों द्वारा पूजे जाने वाले की जय,
जिनके पास शुद्ध और महिमामय अभिव्यक्तियाँ हैं, जो सूर्य के समान अज्ञान के अंधकार को नष्ट करते हैं, और दिव्य किरणों को एक माला के रूप में धारण करते हैं।

“ओम, जय हो उसकी जो सभी अच्छे कर्मों का निर्माण करता है, जो सूर्य के समान शुभता प्रदान करता है,
जिसकी आँखें हैं जो पूरे ब्रह्मांड को देखती हैं, और सांसारिक अस्तित्व के बंधन से मुक्त हो जाती हैं।”

“ओम, कमल के फूलों के गुच्छे को दृश्यमान बनाने वाले की जय,
जो तीनों प्रकार के क्लेशों का नाश करता है, और स्वाभाविक रूप से भीतर निवास करता है, मन की पीड़ा को दूर करता है।

“ओम, आंखों के रोगों को दूर करने वाले, देवताओं में सर्वश्रेष्ठ, और पृथ्वी के बोझ को दूर करने वाले की जय हो,
जो निरंतर वर्षा करता है, और दूसरों की रक्षा और लाभ का व्रत रखता है।”

“हे सूर्य भगवान, दयालु, कृपया अपनी दया दिखाओ,
सभी अज्ञान और भ्रम को दूर करो, और सत्य का ज्ञान दो।”

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