🪔श्री धन्वंतरि जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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श्री धन्वंतरि जी की आरती (हिंदी) –

जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।जय धन्वं.।।

तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।जय धन्वं.।।

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।जय धन्वं.।।

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।जय धन्वं.।।

तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।जय धन्वं.।।

हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।जय धन्वं.।।

धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।जय धन्वं.।।

श्री धन्वंतरि जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF
🪔श्री धन्वंतरि जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Dhanvantari Ji Ki Aarti, Hindi (English Lyrics) –

Jai Dhanvantari Deva,
jai Dhanvantari Ji Deva.
Jara-roga se peedit,
jan-jan sukh Deva. || Jai Dhanvantari… ||

Tum samudra se nikale,
amrit kalash liye.
Devasur ke sankat
aakar door kiye. || Jai Dhanvantari… ||

Ayurved banaya,
jag mein phailaya.
Sada swasth rehne ka,
sadhan batlaya. || Jai Dhanvantari… ||

Bhuja chaar ati sundar,
shankh sudhaa dhari.
Ayurved vanaspati se
shobha bhaari. || Jai Dhanvantari… ||

Tum ko jo nit dhyaave,
rog nahin aave.
Asaadhya rog bhi uska,
nishchay mit jaave. || Jai Dhanvantari… ||

Haath jodkar Prabhujee,
daas khada tera.
Vaidya-samaj tumhaare
charano ka gherra. || Jai Dhanvantari… ||

Dhanvantari Ji ki aarti
jo koi nar gaave.
Rog-shok na aaye,
sukh-samriddhi paave. || Jai Dhanvantari… ||

https://shriaarti.in/

श्री धन्वंतरि जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

Jai Dhanvantari Deva, Jai Dhanvantari Ji Deva.
Hail Lord Dhanwantari, Hail Dhanwantari ji.
This verse expresses salutations to Lord Dhanvantari.

Suffering from old age, give happiness to the people. , Jai Dhanwantari…||
O Lord, you give happiness to all who are afflicted by old age and disease.
This verse acknowledges Dhanvantari’s ability to remove suffering and bring happiness to people.

You came out of the sea, for the pot of nectar.
He came and removed the problems of Dev-Sura. , Jai Dhanwantari…||
You came out of the ocean with the urn of nectar.
O Lord, you have removed the troubles of the gods and the asuras.
This verse narrates the mythological story of Dhanvantari appearing from the ocean with the nectar of life and helping the divine and demonic beings.

Made Ayurveda, spread it in the world.
Told the means to stay healthy forever. , Jai Dhanwantari…||
You created Ayurveda and spread it in the world.
O Lord, You have shown the means of maintaining eternal welfare.
This verse attributes the development of Ayurveda, the traditional Indian system of medicine, to Dhanvantari.

Four arms are very beautiful, Conch Sudha Dhari.
Beautiful with Ayurveda plant. , Jai Dhanwantari…||
You have four beautiful arms, which have conch shells and nectar.
Equipped with herbs of Ayurveda, O Lord!
This verse describes the divine nature of Dhanvantari and her relation to Ayurvedic herbs.

The one who meditates on you daily, diseases do not come.
His incurable disease should also be cured. , Jai Dhanwantari…||
Those who meditate on you remain free from diseases.
O Lord, by His grace even incurable diseases are surely cured.
This verse emphasizes the healing power of devotion to Dhanvantari, suggesting that even impossible diseases can be cured.

Prabhuji, your servant is standing with folded hands.
Vaidya-Society surrounds your feet. , Jai Dhanwantari…||
Your servants stand humbly before you with folded hands.
O Lord, the community of doctors worships your feet.
This verse shows the faith and devotion of the Vaidyas towards Dhanvantari.

Whoever sings the aarti of Dhanvantari ji.
Diseases and sorrows should not come, may you get happiness and prosperity. , Jai Dhanwantari…||
Whoever sings hymns of worship to Lord Dhanvantari
Being free from disease and sorrow, you will get happiness and prosperity.
This verse highlights the benefits of singing the hymn of Dhanvantari, which promises freedom from suffering and attainment of well-being.

श्री धन्वंतरि जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जय भगवान धन्वंतरि, जय धन्वंतरि जी की।
यह श्लोक भगवान धन्वंतरि को नमस्कार व्यक्त करता है।

जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा। || जय धन्वन्तरि…||
बुढ़ापे और बीमारी से पीड़ित, हे भगवान, आप सभी को खुशी देते हैं।
यह श्लोक धन्वंतरि की पीड़ा को दूर करने और लोगों को खुशी लाने की क्षमता को स्वीकार करता है।

तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश के लिए।
देव-सुरा के संकट आकर दूर किये। || जय धन्वन्तरि…||
आप अमृत का कलश लेकर समुद्र से निकले।
हे भगवान, आपने देवताओं और असुरों की परेशानियों को दूर कर दिया।
यह श्लोक जीवन के अमृत के साथ समुद्र से प्रकट होने और दिव्य और राक्षसी प्राणियों की मदद करने वाले धन्वंतरि की पौराणिक कहानी का वर्णन करता है।

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया। || जय धन्वन्तरि…||
आपने आयुर्वेद का निर्माण किया और उसे विश्व में फैलाया।
हे भगवान, आपने सतत कल्याण बनाए रखने के साधन बताए।
यह श्लोक पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के विकास का श्रेय धन्वंतरि को देता है।

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी। || जय धन्वन्तरि…||
आपकी चार सुन्दर भुजाएँ हैं, जिनमें शंख और अमृत है।
आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों से सुसज्जित, हे भगवान!
यह श्लोक धन्वंतरि के दिव्य स्वरूप और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से उनके संबंध का वर्णन करता है।

तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे। || जय धन्वन्तरि…||
जो आपका ध्यान करते हैं वे रोगों से मुक्त रहते हैं।
हे प्रभु, उनकी कृपा से असाध्य रोग भी निश्चित रूप से दूर हो जाते हैं।
यह श्लोक धन्वंतरि की भक्ति की उपचार शक्ति पर जोर देता है, यह सुझाव देता है कि असंभव बीमारियों को भी ठीक किया जा सकता है।

हाथ जोड़ कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा। || जय धन्वन्तरि…||
आपके सेवक नम्रतापूर्वक हाथ जोड़कर आपके सामने खड़े हैं।
हे प्रभु, चिकित्सकों का समुदाय आपके चरणों का आदर करता है।
यह श्लोक धन्वंतरि के प्रति वैद्यों की श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है।

धन्वंतरि जी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आये, सुख-समृद्धि पावे। || जय धन्वन्तरि…||
भगवान धन्वंतरि की पूजा का जो भी भजन गाता है
रोग-शोक से मुक्त होकर सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।
यह श्लोक धन्वंतरि के भजन को गाने के लाभों पर प्रकाश डालता है, जो कष्टों से मुक्ति और कल्याण की प्राप्ति का वादा करता है।

श्री धन्वंतरि: जानिए इस अवतार के बारे में सब कुछ

श्री धन्वंतरि भारतीय ज्ञान और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं और इन्हें आयुर्वेद के पिता के रूप में जाना जाता है। वे भगवान धन्वंतरि के नाम से भी जाने जाते हैं। श्री धन्वंतरि को आयुर्वेद का ज्ञान प्रदान करने वाला माना जाता है।

श्री धन्वंतरि का इतिहास बहुत प्राचीन है। इनके अवतार का वर्णन पुराणों में मिलता है। इनके अवतार का समय समुद्र मंथन के समय माना जाता है। श्री धन्वंतरि को चंद्रमा की शरद पूर्णिमा के दिन पूजा जाता है। श्री धन्वंतरि की पूजा विशेष रूप से आयुर्वेदिक उपचारों के लिए की जाती है।

श्री धन्वंतरि का इतिहास

वेदों में उल्लेख

धन्वंतरि का उल्लेख वेदों में मिलता है। वेदों में इन्हें भगवान विष्णु के अवतार के रूप में वर्णित किया गया है। वेदों में इन्हें औषधियों के प्रभाव के ज्ञान के लिए जाना जाता है। इन्हें वैद्यों का देवता भी कहा जाता है।

पुरानों में उल्लेख

पुराणों में धन्वंतरि का उल्लेख भी मिलता है। इन्हें वैद्यों का पिता भी कहा जाता है। इन्हें देवताओं के वैद्य भी कहा जाता है। धन्वंतरि का अवतार समुद्र मंथन के समय हुआ था। इन्हें जीवन देने वाले अमृत के कलश का उत्पादन करने वाले भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इन्हें आयुर्वेद के पिता भी कहा जाता है।

धन्वंतरि ने चिकित्सा विज्ञान का विकास किया था। इन्हें अष्टांग आयुर्वेद का ज्ञान था। इन्होंने बहुत से रोगों के इलाज के लिए औषधियों का उपयोग किया था। धन्वंतरि ने भारतीय चिकित्सा विज्ञान का विस्तार किया था। इन्हें आयुर्वेद के पिता के रूप में जाना जाता है।

धन्वंतरि के उपदेशों का उपयोग आज भी विभिन्न रोगों के इलाज में किया जाता है। इन्हें भारतीय चिकित्सा विज्ञान के प्रथम वैद्य के रूप में सम्मानित किया जाता है।

श्री धन्वंतरि की विशेषताएं

अवतार

श्री धन्वंतरि हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। वे आयुर्वेद के पिता माने जाते हैं और रोगों के निदान तथा उनके उपचार के लिए उपयोग होने वाली औषधियों को प्रथम बार प्रदान करने वाले हैं। धन्वंतरि जी ने समुद्र मंथन के समय अमृत को उत्पन्न करने के बाद उसे लेकर लोगों के लिए उपचार विधि बताई थी।

स्वरूप

धन्वंतरि जी की चार भुजाएं होती हैं और वे विष्णु के साथ ही एक ही स्वरूप में होते हैं। उनकी ऊपर की दो भुजाएं शंख और चक्र धारण करती हैं जबकि दो निचली भुजाएं जलूका और औषधियों के साथ अमृत कलश धारण करती हैं। शंख और चक्र धारण करने से धन्वंतरि जी के उपचार विधि का प्रचलन हुआ था।

धन्वंतरि जी के उपचार विधि में औषधियों का विशेष महत्व होता है। उन्होंने बताया था कि विभिन्न रोगों के लिए विभिन्न औषधियों का उपयोग करना चाहिए। उनकी उपचार विधि में आयुर्वेद के सिद्धांतों का विशेष महत्व होता है।

धन्वंतरि जी की मूर्ति अमृत कलश धारण करते हुए देखी जाती है। उनकी मूर्ति को धनतेरस के दिन पूजा जाता है और लोग उनके आशीर्वाद से रोगों से मुक्ति प्राप्त करते हैं।

श्री धन्वंतरि की पूजा

पूजा विधि

धन्वंतरि भगवान की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि का अनुसरण किया जा सकता है:

  1. सबसे पहले धन्वंतरि भगवान की मूर्ति को साफ करें। इसके लिए एक चम्मच घी लें और उसे धन्वंतरि भगवान की मूर्ति पर लगाएं। फिर एक कप गंगाजल लें और उसे भी मूर्ति पर चढ़ाएं।
  2. अब धन्वंतरि भगवान के लिए पूजा स्थल तैयार करें। इसके लिए एक छोटी टेबल लें और उसे पूजा स्थल के रूप में सजाएं। फिर उस पर धन्वंतरि भगवान की मूर्ति रखें।
  3. अब धन्वंतरि भगवान की पूजा के लिए विभिन्न प्रकार के फूल, दीपक, धूप, नैवेद्य आदि की तैयारी करें। इसके बाद धन्वंतरि भगवान की मूर्ति के सामने उन्हें अर्पित करें।
  4. धन्वंतरि भगवान की पूजा के दौरान धन्वंतरि मंत्र का जाप करें।

मंत्र

धन्वंतरि मंत्र का जाप करने से धन्वंतरि भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इस मंत्र का जाप करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में समृद्धि आती है। धन्वंतरि मंत्र निम्नलिखित है:

ॐ नमो भगवते धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्व रोग विनाशनाय त्रिलोक नाथाय श्री महाविष्णु स्वरूपाय श्री धन्वंतरये नमः॥

श्री धन्वंतरि और आयुर्वेद

आयुर्वेद में योगदान

श्री धन्वंतरि आयुर्वेद के मूल स्थापक हैं। इन्होंने आयुर्वेद का जन्म दिया था और इसे व्यापक रूप से प्रचलित किया था। धन्वंतरि ने आयुर्वेद में विभिन्न औषधियों का उपयोग करने का तरीका बताया था। इन्होंने बताया कि कैसे विभिन्न वनस्पतियों से औषधि तैयार की जाती है और इसे उपयोग करने का सही तरीका क्या है। इन्होंने आयुर्वेद में संजीवनी बूटी का भी जिक्र किया था।

धन्वंतरि ने आयुर्वेद में खान-पान और व्यायाम के महत्व को भी बताया था। इन्होंने बताया कि कैसे व्यायाम और स्वस्थ खानपान आपके शरीर को स्वस्थ रखते हैं। इन्होंने बताया कि कैसे व्यायाम और स्वस्थ खानपान आपके शरीर को स्वस्थ रखते हैं। इन्होंने आयुर्वेद में वस्त्र धारण करने के फायदे को भी बताया था।

श्री धन्वंतरि के मंदिर

भगवान धन्वंतरि भारतीय धर्म के अनुसार आयुर्वेद के देवता हैं। उन्हें सभी रोगों के निवारण करने वाले देवता के रूप में जाना जाता है। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं।

भारत भर में कई श्री धन्वंतरि के मंदिर हैं जहां भक्त उनकी पूजा करते हैं। यहां कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताया जा रहा है:

मंदिर का नामस्थान
श्री धन्वंतरि मंदिरतमिलनाडु के कोयंबटूर में आर्य वैद्य फार्मेसी परिसर में स्थित है।
श्री धन्वंतरि मंदिरत्रिपुरा के त्रिपुरसुंदरी में स्थित है।
श्री धन्वंतरि मंदिरकेरल के थ्रिस्सुर में स्थित है।
श्री धन्वंतरि मंदिरगुजरात के अहमदाबाद में विश्व विद्यालय रोड पर स्थित है।
श्री धन्वंतरि मंदिरअण्डमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में स्थित है।

इन मंदिरों में भक्त धन्वंतरि देवता की पूजा करते हैं और उनसे अपनी सेहत की दुर्दशा से निजात पाने की कामना करते हैं। यहां लोग धन्वंतरि मंत्र का जाप भी करते हैं जो उन्हें अच्छे स्वास्थ्य और लंबे जीवन की प्राप्ति में मदद करता है।

श्री धन्वंतरि के प्रतीक

धन्वंतरि हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु के अवतार हैं। उन्हें चिकित्सा के देवता माना जाता है और उनका जीवन आयुर्वेद के उपचारों की शुरुआत के रूप में माना जाता है। उन्हें स्वस्थ जीवन के संबंध में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्री धन्वंतरि के प्रतीक में कमल का फूल होता है। यह फूल धन, समृद्धि और सुख का प्रतीक होता है। धन्वंतरि के दो हाथ होते हैं जिनमें एक में अमृत का कलश होता है और दूसरे में चमत्कारिक औषधि का फूल होता है।

धन्वंतरि के प्रतीक में उनके शक्तिशाली चिकित्सा गुणों का प्रतिनिधित्व होता है। उनके द्वारा लोगों को आरोग्य, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। उनके इस प्रतीक को देखकर लोग उनके चिकित्सा गुणों को याद करते हैं और उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं।

श्री धन्वंतरि के प्रतीक में उनके चिकित्सा गुणों के अलावा धन की प्राप्ति का भी प्रतीक होता है। इसलिए धनतेरस के दिन लोग इनकी पूजा करते हैं और उनसे धन की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।

श्री धन्वंतरि के प्रतीक को देखकर लोग उनके चिकित्सा गुणों को याद करते हैं और उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। धनतेरस के दिन लोग इनकी पूजा करते हैं और उनसे

पूछे जाने वाले प्रश्न

धनवंतरी कौन थे?

धनवंतरी एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा विद्वान थे जो आयुर्वेद के पिता माने जाते हैं। उन्होंने आयुर्वेद की शुरुआत की और इसे लोगों के लिए समझाने का प्रयास किया।

धन्वंतरि भगवान कौन होते हैं?

धन्वंतरि भगवान विष्णु के अवतार में माने जाते हैं। उन्होंने आयुर्वेद का प्रवर्तन किया था। इसलिए वे आयुर्वेद के देवता भी कहलाते हैं।

भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे की जाती है?

भगवान धन्वंतरि की पूजा करने के लिए धनतेरस का दिन उत्तम होता है। इस दिन लोग धन्वंतरि मंत्र का जाप करते हैं और धन्वंतरि की मूर्ति को अर्घ्य देते हैं। इस दिन लोग आपस में गिफ्ट्स भी देते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं।

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