🪔 श्री आदिनाथ भगवान की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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श्री आदिनाथ भगवान की आरती (हिंदी) –

आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की,
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की,
रोम रोम पुलकित होता देख मूरत आपकी,
आरती हो बाबा, आरती हो ।

प्रभुजी हमसब उतारें थारी आरती,
तुम धर्म धुरन्धर धारी, तुम ऋषभ प्रभु अवतारी,
तुम तीन लोक के स्वामी, तुम गुण अनंत सुखकारी ।

इस युग के प्रथम विधाता, तुम मोक्ष मार्म के दाता,
जो शरण तुम्हारी आता, वो भव सागर तिर जाता ।
हे… नाम हे हजारों ही गुण गान की…

तुम ज्ञान की ज्योति जमाए, तुम शिव मारग बतलाए,
तुम आठो करम नशाए, तुम सिद्ध परम पद पाये ।

मैं मंगल दीप सजाऊं, मैं जग-मग ज्योति जलाऊं,
मैं तुम चरणों में आऊं, मैं भक्ति में रम जाऊं ।

हे झूम-झूम-झूम नाचूं करूं आरती।
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की॥

॥ इति श्री आदिनाथ आरती संपूर्णम् ॥

🪔 श्री आदिनाथ भगवान की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Shri Aadinth Ji Ki Aarti, Hindi (English Lyrics) –

Aarti Utari Adinath Bhagwan Ki.
Maat Marudevi Pita Nabirai Lal Ki.
Rom Rom Pulkit Hota Dekh Murat Aapki.
Aarti Ho Baba, Aarti Ho.

Prabhuji Humsab Uttare Thari Aarti,
Tum Dhram Durundr Dhari, Tum Rishabh Prabhu Avtari.
Tum Teeno Lok Le Swami, Tum Gunn Anant Sukhkaari.

Iss Yug Ke Prathm Vidhata, Tum Morksh Ke Data.
Jo Shran Tumhari Aata, Vo Bhav Sagar Teer Jata.
Hey Naam… Naam Hey Hzaro Hi Gunn Gaan Ki…

Tum Gyaan Ki Jyoti Jmaaye, Tum Shiv Marag Batlaaye.
Tum Aatho Karam Nsaaye, Tum Siddh Param Padh Paaye.

Mai Mangal Deep Sjaoo, Mai Jag-Mag Jyoti Jlaau.
Mai Tum Charnoo Me Aau, Mai Bhakti Me Rum Jau.

Hei Jhoom-Jhoom-Jhoom Naachu Karu Aarti.
Aarti Utaru Adinath Bhagwan Ki.

!! Iti Shri Aadinath Aarti !!

https://shriaarti.in/

श्री आदिनाथ भगवान की आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

Aarti Utari Adinath Bhagwan Ki – I offer Aarti to Lord Adinath (a name for Lord Shiva).

Maat Marudevi Pita Nabirai Lal Ki – Mother Marudevi and Father Nabirai Lal (two deities) are praised.

Rom Rom Pulkit Hota Dekh Murat Aapki – I see your (Lord Adinath’s) divine form in every fiber of my being, and it fills me with joy.

Aarti Ho Baba, Aarti Ho – Let there be Aarti for Baba (a term of endearment for Lord Shiva).

Prabhuji Humsab Uttare Thari Aarti – We (devotees) perform Aarti to please you, our Lord.

Tum Dhram Durundr Dhari – You hold the weight of righteousness on your shoulders.

Tum Rishabh Prabhu Avtari – You are the incarnation of Lord Rishabh (an avatar of Lord Vishnu).

Tum Teeno Lok Le Swami – You are the Lord of all three worlds.

Tum Gunn Anant Sukhkaari – You are the embodiment of infinite virtues and bring happiness to all.

Iss Yug Ke Prathm Vidhata – You are the first creator of this era.

Tum Morksh Ke Data – You grant liberation to those seeking it.

Jo Shran Tumhari Aata, Vo Bhav Sagar Teer Jata – Those who seek refuge in you cross the ocean of samsara (cycle of birth and death).

Hey Naam… Naam Hey Hzaro Hi Gunn Gaan Ki… – Your name is a source of infinite virtues and praise.

Tum Gyaan Ki Jyoti Jmaaye – You are the source of the light of knowledge.

Tum Shiv Marag Batlaaye – You show the path of Lord Shiva.

Tum Aatho Karam Nsaaye – You bless us with the eight-fold achievements (Ashta Siddhi).

Tum Siddh Param Padh Paaye – You have attained the supreme state of enlightenment.

Mai Mangal Deep Sjaoo – I light the auspicious lamp.

Mai Jag-Mag Jyoti Jlaau – I illuminate the surroundings with its light.

Mai Tum Charnoo Me Aau – I seek refuge in your feet.

Mai Bhakti Me Rum Jau – I immerse myself in devotion.

Hei Jhoom-Jhoom-Jhoom Naachu Karu Aarti – I dance and perform the Aarti.

श्री आदिनाथ भगवान की आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

आरती उतारी आदिनाथ भगवान की – मैं भगवान आदिनाथ (भगवान शिव का एक नाम) की आरती करता हूं।

मात मरुदेवी पिता नबिराय लाल की – माता मरुदेवी और पिता नबिराय लाल (दो देवता) की स्तुति की जाती है।

रोम रोम पुलकित होता देख मूरत आपकी – मैं अपने अस्तित्व के कण-कण में आपका (भगवान आदिनाथ का) दिव्य रूप देखता हूं, और यह मुझे आनंद से भर देता है।

आरती हो बाबा, आरती हो – बाबा की आरती हो (भगवान शिव के लिए प्रिय शब्द)।

प्रभुजी हमसब उत्तरे थारी आरती – हम (भक्त) आपको प्रसन्न करने के लिए आरती करते हैं, हमारे भगवान।

तुम धरम दुरुंदर धारी – आप अपने कंधों पर धार्मिकता का भार रखते हैं।

तुम ऋषभ प्रभु अवतारी – आप भगवान ऋषभ (भगवान विष्णु के एक अवतार) के अवतार हैं।

तुम तीनो लोक ले स्वामी – तुम तीनों लोकों के स्वामी हो।

तुम गुन अनंत सुखकारी – आप अनंत गुणों के अवतार हैं और सभी को खुशी देते हैं।

इस युग के प्रथम विधाता – आप इस युग के पहले निर्माता हैं।

तुम मोर्कश के दाता – तुम मोक्ष चाहने वालों को मुक्ति प्रदान करते हो।

जो शरण तुम्हारी आटा, वो भव सागर तीर जटा – जो आपकी शरण लेते हैं वे संसार (जन्म और मृत्यु के चक्र) के सागर को पार कर जाते हैं।

हे नाम… नाम हे हजारों ही गुन गांव की… – आपका नाम अनंत गुणों और प्रशंसा का स्रोत है।

तुम ज्ञान की ज्योति जमाये – आप ज्ञान के प्रकाश के स्रोत हैं।

तुम शिव मरग बतलाये – तुम भगवान शिव का मार्ग दिखाते हो।

तुम आठो करम नसाये – आप हमें आठ गुना सिद्धियों (अष्ट सिद्धि) का आशीर्वाद देते हैं।

तुम सिद्ध परम पद पाये – आपने आत्मज्ञान की सर्वोच्च अवस्था प्राप्त कर ली है।

माई मंगल दीप सजाओ – मैं शुभ दीप जलाता हूं।

माई जग-मग ज्योति जलाऊ – मैं इसके प्रकाश से चारों ओर प्रकाश करता हूँ।

माई तुम चारनू में आउ – मैं आपके चरणों की शरण लेता हूं।

माई भक्ति में रम जौ – मैं भक्ति में डूब जाता हूं।

हे झूम-झूम-झूम नाचू करु आरती – मैं नृत्य करता हूं और आरती करता हूं।

हिंदी आरती संग्रह देखे – लिंक

श्री आदिनाथ भगवान के बारे में जाने –

श्री आदिनाथ भगवान पहले तीर्थंकर और जैन धर्म में अत्यधिक पूजनीय हैं। ऐसा माना जाता है कि वह 8 मिलियन वर्ष पहले इस धरती पर आये थे और उन्हें जैन धर्म का संस्थापक माना जाता है।

जैन परंपरा के अनुसार, आदिनाथ भगवान ने ध्यान और आत्म-अनुशासन के माध्यम से केवला ज्ञान, स्वयं का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया। फिर उन्होंने अपनी शिक्षाओं का प्रचार करना शुरू किया, जिससे कई लोग अहिंसा, सच्चाई और भौतिक संपत्ति से अलग होने के अपने मार्ग का अनुसरण करने लगे।

आदिनाथ भगवान को ऋषभनाथ, आदिश्वर और आदिपुरुष जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। उन्हें अक्सर जैन कला में उनके प्रतीक के रूप में एक बैल के साथ चित्रित किया जाता है, जब उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग दिया और अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की तब वह इस पर सवारी करते थे।

आदिनाथ भगवान की शिक्षाएँ जैन दर्शन का आधार बनती हैं, जो अहिंसा, कर्म और भौतिक संपत्ति से वैराग्य के महत्व पर जोर देती है। उनकी शिक्षाएं सभी जीवित प्राणियों के सम्मान के विचार और सरल और संयमित जीवन जीने के महत्व को भी बढ़ावा देती हैं।

जैन धर्म में, आदिनाथ भगवान को एक दिव्य व्यक्ति माना जाता है जो आध्यात्मिकता और ज्ञान के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनकी शिक्षाएँ दुनिया भर के लाखों जैनियों को करुणा, आत्म-अनुशासन और आध्यात्मिक शुद्धता का जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्न –

आदिनाथ भगवान की आयु कितनी है?

आदिनाथ भगवान की आयु 84 लाख वर्ष पूर्व थी।


आदिनाथ भगवान के कितने नाम थे?

आदिनाथ भगवान के कई नाम हैं जैसे ऋषभदेव, ऋषभनाथ, वृषभनाथ, पुरूदेव आदि।

आदिनाथ के कितने पुत्र थे?

आदिनाथ भगवान के 100 पुत्र थे।

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