🪔महाराजा अग्रसेन जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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महाराजा अग्रसेन जी की आरती (हिंदी) –

जय श्री अग्र हरे, स्वामी जय श्री अग्र हरे..!
कोटि कोटि नत मस्तक, सादर नमन करें ..!! जय श्री!

आश्विन शुक्ल एकं, नृप वल्लभ जय!
अग्र वंश संस्थापक, नागवंश ब्याहे..!! जय श्री!

केसरिया थ्वज फहरे, छात्र चवंर धारे!
झांझ, नफीरी नौबत बाजत तब द्वारे ..!! जय श्री!

अग्रोहा राजधानी, इंद्र शरण आये!
गोत्र अट्ठारह अनुपम, चारण गुंड गाये..!! जय श्री!

सत्य, अहिंसा पालक, न्याय, नीति, समता!
ईंट, रूपए की रीति, प्रकट करे ममता..!! जय श्री!

ब्रहम्मा, विष्णु, शंकर, वर सिंहनी दीन्हा!
कुल देवी महामाया, वैश्य करम कीन्हा..!! जय श्री!

अग्रसेन जी की आरती, जो कोई नर गाये!
कहत त्रिलोक विनय से सुख संम्पति पाए..!! जय श्री!

🪔महाराजा अग्रसेन जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Maharaja Agrasen Ji Ki Aarti, Hindi (English Lyrics) –

Jai Shri Agr Hare, Swami Jai Shri Agr Hare..!
Koti Koti Nat Mastak, Sadar Naman Kare..!! Jai Shri!

Ashwin Shukl Ekam, Nrip Vallabh Jai!
Agr Vansh Sthapak, Nagvansh Byahe..!! Jai Shri!

Kesariya Thwaj Fahre, Chatra Chavarn Dhaare!
Jhanjh, Nafiri Naubat Baajat Tab Dware..!! Jai Shri!

Agraha Rajdhani, Indra Sharan Aaye!
Gotr Attharah Anupam, Charan Gund Gaye..!! Jai Shri!

Satya, Ahimsa Palak, Nyay, Neeti, Samata!
Eent, Rupeye Ki Reeti, Prakat Kare Mamta..!! Jai Shri!

Brahma, Vishnu, Shankar, Var Singhani Deenha!
Kul Devi Mahamaya, Vaishya Karam Kiinha..!! Jai Shri!

Agrasen Ji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gaye!
Kaahat Trilok Vinay Se Sukh Sampati Paye..!! Jai Shri!

https://shriaarti.in/

महाराजा अग्रसेन जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

Jai Shri Agr Hare, Swami Jai Shri Agr Hare..! – Hail Lord Agrasen, Hail Lord Agrasen..!

Koti Koti Nat Mastak, Sadar Naman Kare..!! Jai Shri! – Millions of people bow their heads in reverence, Hail Lord Agrasen!

Ashwin Shukl Ekam, Nrip Vallabh Jai! – On the first day of the bright half of the month of Ashwin, Hail the King of Kings!

Agr Vansh Sthapak, Nagvansh Byahe..!! Jai Shri! – The founder of the Agrawal community, who established the Nagvansh dynasty, Hail Lord Agrasen!

Kesariya Thwaj Fahre, Chatra Chavarn Dhaare! – Riding a saffron flag and holding an umbrella, Hail Lord Agrasen!

Jhanjh, Nafiri Naubat Baajat Tab Dware..!! Jai Shri! – The sound of bells, trumpets, and drums reverberate at his doorstep, Hail Lord Agrasen!

Agraha Rajdhani, Indra Sharan Aaye! – The city of Agraha, where even Indra seeks refuge, Hail Lord Agrasen!

Gotr Attharah Anupam, Charan Gund Gaye..!! Jai Shri! – The unique 18 Gotras (clans) seek his divine blessings, Hail Lord Agrasen!

Satya, Ahimsa Palak, Nyay, Neeti, Samata! – Upholder of truth, non-violence, justice, righteousness, and equality,

Eent, Rupeye Ki Reeti, Prakat Kare Mamta..!! Jai Shri! – Who manifested love in the form of bricks and coins, Hail Lord Agrasen!

Brahma, Vishnu, Shankar, Var Singhani Deenha! – Who was bestowed with the powers of Brahma, Vishnu, Shiva, and the lion-like Varaha,

Kul Devi Mahamaya, Vaishya Karam Kiinha..!! Jai Shri! – The presiding deity of the Agrawal community, who is the benefactor of the Vaishya community, Hail Lord Agrasen!

Agrasen Ji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gaye! – Whoever sings the Aarti (prayer) of Lord Agrasen,

Kaahat Trilok Vinay Se Sukh Sampati Paye..!! Jai Shri! – Will attain peace and prosperity in all three realms, Hail Lord Agrasen!

महाराजा अग्रसेन जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

जय श्री अग्र हरे, स्वामी जय श्री अग्र हरे..! – जय अग्रसेन भगवान, जय अग्रसेन भगवान..!

कोटि कोटि नट मस्तक, सदर नमन करे..!! जय श्री! – लाखों लोग श्रद्धा से शीश झुकाते हैं, अग्रसेन भगवान की जय!

आश्विन शुक्ल एकम, नृप वल्लभ जय! – आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन, राजाओं के राजा की जय हो!

अग्र वंश स्थापक, नागवंश ब्याहे..!! जय श्री! – नागवंश वंश की स्थापना करने वाले अग्रवाल सम्प्रदाय के संस्थापक, अग्रसेन भगवान की जय!

केसरिया थ्वाज फाहरे, चतरा चवर्ण धरे! – भगवा ध्वज पर सवार और छाता लिए, अग्रसेन भगवान की जय!

झांझ, नफिरी नौबत बजात तब द्वारे..!! जय श्री! – उनके द्वार पर घण्टे, तुरही और नगाड़ों की ध्वनि गूँजती है, जय अग्रसेन जी!

अग्रहा राजधानी, इंद्र शरण आए! – अग्रहा नगरी, जहाँ इन्द्र भी शरण लेते हैं, अग्रसेन जी की जय!

गोत्र अतहर अनुपम, चरण गुंड गए..!! जय श्री! – अद्वितीय 18 गोत्र (कुल) उनके दिव्य आशीर्वाद की कामना करते हैं, जय अग्रसेन भगवान!

सत्य, अहिंसा पालक, न्याय, नीति, समता! – सत्य, अहिंसा, न्याय, धर्म और समानता के रक्षक,

ईंट, रुपे की रीति, प्रकट करे ममता..!! जय श्री! – ईंटों और सिक्कों के रूप में प्रेम प्रकट करने वाले, अग्रसेन भगवान की जय!

ब्रह्मा, विष्णु, शंकर, वर सिंघानी दीन्हा! – जिसे ब्रह्मा, विष्णु, शिव और शेर जैसी वराह की शक्तियों से नवाजा गया था,

कुल देवी महामाया, वैश्य करम कीन्हा..!! जय श्री! – वैश्य समाज के हितैषी अग्रवाल समाज के अधिष्ठाता देव अग्रसेन जी की जय!

अग्रसेन जी की आरती, जो कोई नर गए! – जो कोई भी भगवान अग्रसेन की आरती (प्रार्थना) गाता है,

कहत त्रिलोक विनय से सुख संपति पाये..!! जय श्री! – तीनों लोकों में सुख-समृद्धि प्राप्त करेंगे, अग्रसेन भगवान की जय!

हिंदी आरती संग्रह देखे – लिंक

महाराजा अग्रसेन के बारे में जाने –

महाराजा अग्रसेन एक महान शासक और भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण शासक थे। ऐसा माना जाता है कि वह तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान शासन किये थे, और कहा जाता है कि उनके वंश ने भारत में अग्रवाल और अग्रहरी समुदायों को जन्म दिया।

महाराजा अग्रसेन अपनी प्रजा के प्रति अपनी बुद्धिमत्ता, उदारता और करुणा के लिए जाने जाते थे। वह एक न्यायप्रिय शासक थे जिनको सभी लोग प्यार और सम्मान देते थे। उन्होंने “अग्रहरि” समुदाय की स्थापना की, जो कड़ी मेहनत, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के सिद्धांतों पर आधारित था।

किंवदंती के अनुसार, महाराजा अग्रसेन के सौ पुत्र थे, और उन्होंने अपने राज्य को उनके बीच समान रूप से विभाजित कर दिया। उन्होंने शासन की एक प्रणाली भी स्थापित की जो लोकतंत्र और योग्यता के सिद्धांतों पर आधारित थी। उनका मानना था कि सबसे सक्षम और योग्य व्यक्तियों को शक्ति और अधिकार के पद दिए जाने चाहिए।

महाराजा अग्रसेन कला और संस्कृति के भी संरक्षक थे। उन्होंने संगीत, नृत्य और कलात्मक अभिव्यक्ति के अन्य रूपों के विकास को प्रोत्साहित किया। वह हिंदू धर्म का एक कट्टर अनुयायी था और अपनी धर्मपरायणता और देवताओं के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता था।

आज महाराजा अग्रसेन को एक महान शासक और भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। उनकी विरासत भारत भर में लाखों लोगों को प्रेरित करती है, और ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और कड़ी मेहनत पर उनकी शिक्षाएं आज भी आधुनिक दुनिया में प्रासंगिक हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्न –

महाराजा अग्रसेन के कितने गोत्र हैं?

महाराजा अग्रसेन द्वारा बनाए गए 18 अग्रवाल गोत्र हैं।


महाराजा अग्रसेन कौन से वंश से थे?

महाराजा अग्रसेन सूर्यवंशी वंशज थे।



अग्रसेन महाराज की पत्नी कौन है?

अग्रसेन महाराज की पत्नी का नाम रानी मधवी था। (source: Jyoti Dehliwal)


महाराजा अग्रसेन के कितने पुत्र थे?

महाराजा अग्रसेन के 18 पुत्र थे। (स्रोत: gkprashnuttar.com)

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