🪔जग जननी जय जय आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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जग जननी जय जय आरती (हिंदी),jag janani maa durga ki aarti, Arti Durga Mata ki Jag Janani Jai Jai Maa, जग जननी जय जय मैया जग जननी जय जय, आरती दुर्गा माता की –

जगजननी जय! जय!!
माँ! जगजननी जय! जय!!
भयहारिणि, भवतारिणि,
माँ भवभामिनि जय! जय ॥
जगजननी जय जय..॥
तू ही सत-चित-सुखमय,
शुद्ध ब्रह्मरूपा ।
सत्य सनातन सुन्दर,
पर-शिव सुर-भूपा ॥
जगजननी जय जय..॥

आदि अनादि अनामय,
अविचल अविनाशी ।
अमल अनन्त अगोचर,
अज आनँदराशी ॥
जगजननी जय जय..॥

अविकारी, अघहारी,
अकल, कलाधारी ।
कर्त्ता विधि, भर्त्ता हरि,
हर सँहारकारी ॥
जगजननी जय जय..॥

तू विधिवधू, रमा,
तू उमा, महामाया ।
मूल प्रकृति विद्या तू,
तू जननी, जाया ॥
जगजननी जय जय..॥

राम, कृष्ण तू, सीता,
व्रजरानी राधा ।
तू वांछाकल्पद्रुम,
हारिणि सब बाधा ॥
जगजननी जय जय..॥

दश विद्या, नव दुर्गा,
नानाशस्त्रकरा ।
अष्टमातृका, योगिनि,
नव नव रूप धरा ॥
जगजननी जय जय..॥

तू परधामनिवासिनि,
महाविलासिनि तू ।
तू ही श्मशानविहारिणि,
ताण्डवलासिनि तू ॥
जगजननी जय जय..॥

सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या,
तू शोभाऽऽधारा ।
विवसन विकट-सरुपा,
प्रलयमयी धारा ॥
जगजननी जय जय..॥

तू ही स्नेह-सुधामयि,
तू अति गरलमना ।
रत्‍‌नविभूषित तू ही,
तू ही अस्थि-तना ॥
जगजननी जय जय..॥

मूलाधारनिवासिनि,
इह-पर-सिद्धिप्रदे ।
कालातीता काली,
कमला तू वरदे ॥
जगजननी जय जय..॥

शक्ति शक्तिधर तू ही,
नित्य अभेदमयी ।
भेदप्रदर्शिनि वाणी,
विमले! वेदत्रयी ॥
जगजननी जय जय..॥

हम अति दीन दुखी माँ!,
विपत-जाल घेरे ।
हैं कपूत अति कपटी,
पर बालक तेरे ॥
जगजननी जय जय..॥

निज स्वभाववश जननी!,
दयादृष्टि कीजै ।
करुणा कर करुणामयि!
चरण-शरण दीजै ॥
जगजननी जय जय..॥

जगजननी जय! जय!!
माँ! जगजननी जय! जय!!
भयहारिणि, भवतारिणि,
माँ भवभामिनि जय! जय ॥
जगजननी जय जय..॥

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जग जननी जय जय आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

jag janani maa durga Ki Aarti, Hindi(English Lyrics) –

Jagjanani Jai! Jai!!
Maa! Jagjanani Jai! Jai!!
Bhayaharini, Bhavtarini,
Maa Bhavbhavini Jai! Jai!!
Jagjanani Jai Jai..॥
Tu Hi Sat-Chit-Sukhmay,
Shuddh Brahmroopa.
Satya Sanatan Sundar,
Par-Shiv Sur-Bhupa॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Adi Anadi Anamay,
Avichal Avinashi.
Amal Anant Agocar,
Aj Anandarashi॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Avikari, Aghahari,
Akal, Kaladhari.
Karta Vidhi, Bharta Hari,
Har Sanharakari॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Tu Vidhi-Vidhu, Rama,
Tu Uma, Mahamaya.
Mool Prakriti Vidya Tu,
Tu Janani, Jaya॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Ram, Krishna Tu, Sita,
Vrajrani Radha.
Tu Vanchhakalpadrum,
Harini Sab Badha॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Dash Vidya, Nav Durga,
Nanashastra Kara.
Ashtamatrika, Yogini,
Nav Nav Roop Dhara॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Tu Par-Dham Nivasini,
Mahavilasini Tu.
Tu Hi Shmashan-Viharini,
Tandavalasini Tu॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Sur-Muni-Mohini Saumya,
Tu Shobha Adhara.
Vivasan Vikat-Sarupa,
Pralaymayi Dhara॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Tu Hi Sneha-Sudha Mayi,
Tu Ati Garal Manaa.
Ratnavibhushit Tu Hi,
Tu Hi Asthi-Tana॥
Jagjanani Jai Jai..॥

Mooladhar Nivasi,
Iha-par-siddhiprade.
Kalatita Kali,
Kamala Tu Varade.
Jagjanani Jay Jay!

Shakti Shaktidhar Tu Hi,
Nitya Abhedmayi.
Bhed Pradarshini Vani,
Vimale! Vedtrayi.
Jagjanani Jay Jay!

Hum Ati Din Dukhi Maan!,
Vipat-jaal Ghere.
Hain Kapoot Ati Kapati,
Par Balak Tere.
Jagjanani Jay Jay!

Nij Swabhav Vash Janani!,
Daya Drishti Kiji.
Karuna Kar Karunamayi,
Charan-Sharan Diji.
Jagjanani Jay Jay!

Jagjanani Jay! Jay!!
Maan! Jagjanani Jay! Jay!!
Bhay-harini, Bhavtarini,
Maan Bhav-bhavini Jay! Jay!!
Jagjanani Jay Jay!

jag janani maa durga Ki Aarti in Hindi (English Lyrics) PDF Download – 

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जग जननी जय जय आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

Jagjanani Jai! Jai!! – Hail to the universal mother!

Maa! Jagjanani Jai! Jai!! – Oh mother! Hail to the universal mother!

Bhayaharini, Bhavtarini, Maa Bhavbhavini Jai! Jai!! – Oh mother, who removes fear and suffering, who takes us across the ocean of existence, hail to you!

Tu Hi Sat-Chit-Sukhmay, Shuddh Brahmroopa. Satya Sanatan Sundar, Par-Shiv Sur-Bhupa – You are the embodiment of truth, consciousness, and bliss, pure and divine, eternal and beautiful, the supreme ruler of the gods.

Adi Anadi Anamay, Avichal Avinashi. Amal Anant Agocar, Aj Anandarashi – You are the beginningless and endless, free from all imperfections, unchanging and indestructible, pure and infinite, and the source of eternal joy.

Avikari, Aghahari, Akal, Kaladhari. Karta Vidhi, Bharta Hari, Har Sanharakari – You are unchanging, destroyer of sin, beyond time, the holder of time, the creator, sustainer, destroyer, and the remover of obstacles.

Tu Vidhi-Vidhu, Rama, Tu Uma, Mahamaya. Mool Prakriti Vidya Tu, Tu Janani, Jaya – You are the knowledge of the law of karma, the consort of Lord Rama, the embodiment of divine illusion, the root of nature, the source of knowledge, and the mother of all, hail to you!

Ram, Krishna Tu, Sita, Vrajrani Radha. Tu Vanchhakalpadrum, Harini Sab Badha – You are Lord Rama, Lord Krishna, Sita, Radha, and the wish-fulfilling tree, the destroyer of all obstacles.

Dash Vidya, Nav Durga, Nanashastra Kara. Ashtamatrika, Yogini, Nav Nav Roop Dhara – You are the ten forms of knowledge, the nine forms of Durga, the holder of various weapons, the eight mother goddesses, the yoginis, and the embodiment of all forms.

Tu Par-Dham Nivasini, Mahavilasini Tu. Tu Hi Shmashan-Viharini, Tandavalasini Tu – You reside in the highest abode, and you are radiant and glorious. You are the one who dwells in the cremation grounds and dances the Tandava dance.

Sur-Muni-Mohini Saumya, Tu Shobha Adhara. Vivasan Vikat-Sarupa, Pralaymayi Dhara – You are the enchantress of gods and sages, gentle and beautiful. You are the one who takes on the form of a terrible demon and the one who brings about the destruction of the universe.

Tu Hi Sneha-Sudha Mayi, Tu Ati Garal Manaa. Ratnavibhushit Tu Hi, Tu Hi Asthi-Tana – You are the embodiment of love and nectar, and your mind is extremely sweet. You are adorned with jewels, and you are the essence of bones.

Mooladhar Nivasi – Residing in the Mooladhara chakra

Iha-par-siddhiprade – The giver of worldly accomplishments

Kalatita Kali – Beyond the influence of time and the Kali Yuga

Kamala Tu Varade – Bestower of boons and blessings like a lotus flower

Shakti Shaktidhar Tu Hi – You are the power and the bearer of power

Nitya Abhedmayi – Eternally indivisible

Bhed Pradarshini Vani – The voice that reveals the difference

Vimale! Vedtrayi – O immaculate one! The revealer of the Vedas

Hum Ati Din Dukhi Maan! – I am very miserable and distressed

Vipat-jaal Ghere – Surrounded by a net of troubles

Hain Kapoot Ati Kapati – I am extremely foolish and deceitful

Par Balak Tere – But I am your child

Nij Swabhav Vash Janani! – O mother, please use your inherent nature

Daya Drishti Kiji – Show your merciful glance upon me

जग जननी जय जय आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

जगजननी जय! जय!! – सार्वभौम माता की जय !

माँ! जगजननी जय! जय!! – हे माँ! सार्वभौम माता की जय!

भयहरिणी, भवतारिणी, माँ भवभाविनी जय! जय!! -हे माँ, जो भय और पीड़ा को दूर करती हैं, जो हमें अस्तित्व के सागर के पार ले जाती हैं, आपकी जय हो!

तू ही सत-चित-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा। सत्य सनातन सुंदर, पर-शिव सुर-भूपा – आप सत्य, चेतना और आनंद के अवतार हैं, शुद्ध और दिव्य, शाश्वत और सुंदर, देवताओं के सर्वोच्च शासक हैं।

आदि अनादि अनामय, अविचल अविनाशी। अमल अनंत अगोकार, अज आनंददर्शी – आप अनादि और अनंत हैं, सभी दोषों से मुक्त हैं, अपरिवर्तनीय और अविनाशी हैं, शुद्ध और अनंत हैं, और शाश्वत आनंद के स्रोत हैं।

आविकारी, अघाहरी, अकाल, कालाधारी। कर्ता विधि, भरत हरि, हर संहारकारी – आप अपरिवर्तनीय, पाप का नाश करने वाले, समय से परे, समय के धारक, निर्माता, पालनकर्ता, संहारक और बाधाओं को दूर करने वाले हैं।

तू विधि-विधु, राम, तू उमा, महामाया। मूल प्रकृति विद्या तू, तू जननी, जया – आप कर्म के नियम की ज्ञानी, भगवान राम की पत्नी, दिव्य माया के अवतार, प्रकृति की जड़, ज्ञान के स्रोत और सभी की जननी हैं, जय हो आप!

राम, कृष्ण तू, सीता, व्रजरानी राधा। तु वंचकल्पद्रुम, हरिणी सब बद्ध – आप भगवान राम, भगवान कृष्ण, सीता, राधा और सभी बाधाओं का नाश करने वाले मनोकामना पूर्ण वृक्ष हैं।

दश विद्या, नव दुर्गा, नानाशास्त्र कारा। अष्टमातृका, योगिनी, नव नव रूप धारा – आप ज्ञान के दस रूप, दुर्गा के नौ रूप, विभिन्न शस्त्रों की धारक, आठ मातृ देवियाँ, योगिनियाँ और सभी रूपों के अवतार हैं।

तू पर-धाम निवासिनी, महाविलासिनी तू। तू ही श्मशान-विहारिणी, तांडवलसिनी तू – आप परमधाम में निवास करती हैं, आप कांतिमान और तेजस्विनी हैं। आप शमशान में निवास करने वाले और तांडव नृत्य करने वाले हैं।

सुर-मुनि-मोहिनी सौम्य, तू शोभा अधारा। विवासन विकट-सरूपा, प्रलयमयी धारा – आप देवताओं और ऋषियों की मोहिनी, कोमल और सुंदर हैं। आप भयानक दैत्य का रूप धारण करने वाले और सृष्टि का संहार करने वाले हैं।

तू ही स्नेहा-सुधा मयी, तू अति गरल मन। रत्नविभूषित तु ही, तू ही अस्थि-ताना – आप प्रेम और अमृत के अवतार हैं, और आपका मन अत्यंत मधुर है। तुम रत्नों से विभूषित हो, और तुम अस्थियों के सार हो।

मूलाधार निवासी – मूलाधार चक्र में निवास करने वाला

इहा-पर-सिद्धिप्रदे – सांसारिक सिद्धियों के दाता

कलातीत कलि – समय और कलियुग के प्रभाव से परे

कमला तू वरदे – कमल के फूल के समान वरदान और आशीर्वाद देने वाला

शक्ति शक्तिधर तू ही – आप शक्ति हैं और शक्ति के वाहक हैं

नित्य अभेदमयी – नित्य अविभाज्य

भेद प्रदर्शनी वाणी – भेद प्रकट करने वाली वाणी

विमले! वेदत्रयी – हे निष्कलंक ! वेदों को प्रकट करने वाला

हम अति दिन दुखी मान! – मैं बहुत दुखी और व्यथित हूं

विपतजाल घेरे – संकटों के जाल से घिरा हुआ

हैं कपूत अति कपाती – मैं अत्यंत मूर्ख और छली हूँ

पर बालक तेरे – लेकिन मैं आपका बच्चा हूं

निज स्वभाव वश जननी! – हे माता, कृपया अपने निहित स्वभाव का उपयोग करें

दया दृष्टि कीजी – मुझ पर अपनी कृपादृष्टि दिखाओ

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