🪔परशुराम जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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परशुराम जी की आरती (हिंदी) –

ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी॥ ॐ जय”

जमदग्नी सुत नर-सिंह, मां रेणुका जाया।
मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया॥ ॐ जय”

कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।
चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला॥ ॐ

ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा
सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी॥ ॐ

मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण
दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना॥ ॐ

कर शोभित बर परशु, निगमागम
कंध चाप-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता॥ ॐ

माता पिता तम स्वामी, मीत सखा
‘मेरी बिरद संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे॥ ॐ

अजर-अमर श्री परशराम की, आरती जो
‘पूर्णेन्दु’ शिव साखि, सुख सम्पति पावे॥ ॐ

🪔परशुराम जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF
🪔परशुराम जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Parshuram Ji Ki Aarti, Hindi (English Lyrics) –

Om jai Parshudhaari,
swami jai Parshudhaari.
Sur nar munijan sevat,
Shripati avataari. Om jai…

Jamadagni sut nar-singh,
maan Renuka jaaya.
Martand Bhrgu vanshaj,
tribhuvan yash chaaya. Om jai…

Kandhe sutra janeu,
gal rudraksh mala.
Charan khadaun shobhe,
tilak tripund bhaala. Om…

Tamra syaam ghan keshaa,
sheesh jataa
Sujan hetu ritu madhumay,
dusht dalan aandhi. Om…

Mukh Ravi tej viraajat,
rakt varn
Deen-heen go vipran,
rakshak din raina. Om…

Kar shobhit bar parashu,
nigam-aagam
Kandh chaap-shar Vaishnav,
Brahman kul traata. Om…

Mata Pita tum swaami,
meet sakha
“Meri birad samBhaaro,
dwaar paraa main tere.” Om…

Ajar-amar Shri Parshuram ki,
aarti jo
“Purnendu” Shiv saakhi,
sukh sampati paave. Om…

https://shriaarti.in/

परशुराम जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

“Om Jai Parshudhari, Swami Jai Parshudhari.”
Salutations to Lord Parshuram, the holder of the furrow, Hail to Lord Parshuram.

“Sur Nar Munijan Sewat, Shripati Avatari. Om Jai…”
Gods, humans and sages, all incarnations of Lord Vishnu serve you. Hail thee.

“Jamdagni Sut Nar-Singh, Maan Renuka Jaya.”
Jamadagni’s son, Nara-Singh (Nar-Singh), who raised the honor of Renuka (his mother).

“Martand Bhrigu Descendant, Tribhuvan Yash Chaya. Om Jai…”
Descendant of sage Bhrigu, your fame has spread in all the three worlds. Hail thee.

“Kandhe Sutra Janeu, Gal Rudraksh Mala.”
You wear the sacred thread and sacred thread, Rudraksha beads adorn your neck.

“Let your feet be beautiful, Tilak Tripund Bhala. Om…”
Your feet shine with wooden sandals, and your forehead is adorned with Tripundra Tilak.

“Tamra syam ghan kesha, sheesh jaata
Your black copper hair is wrapped in matted locks on your head.

“The season is sweet for swelling, the storm is evil. Om…”
You are the cause of happiness for the gentlemen and the storm that destroys the wicked.

“Mukh Ravi Tej Virajat, blood color
Your face shines like the sun with red colour.

“Deen-heen go vipran, protector Deen Raina. Om…”
You protect helpless cows and brahmins day and night.

“Kar Shobhit Bar Parshu, Nigam-Agam
Your hand shines with the axe, the Vedas and Agamas are your scriptures.

“Shoulder Chap-Shar Vaishnav, Brahmin Kul Trata. Om…”
You, the protector of the Brahmin clan, wear the bow, arrow and conch shell.

“Parents you meet Swami, Sakha
You are the parent and master, the true friend of all.

“Take care of my bird, I am yours at the door.” Om…
Keep my respect, I am at your door. Hail thee.

“Ajar-Amar Shri Parshuram’s Aarti which
The one who receives this aarti is the eternal Lord Parshuram.

′′ Purnendu ′′ Shiv Sakhi, get happiness and wealth. Om…
Witness of Lord Shiva, bestows happiness and wealth. Hail thee.

परशुराम जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

“ओम जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।”
फरसाधारी भगवान परशुराम को नमस्कार है, भगवान परशुराम की जय हो।

“सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी। ॐ जय…”
देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी भगवान विष्णु के अवतार आपकी सेवा करते हैं। आपकी जय हो.

“जमदग्नि सुत नर-सिंह, मान रेणुका जया।”
जमदग्नि के पुत्र, नर-सिंह (नर-सिंह), जिन्होंने रेणुका (अपनी माँ) का सम्मान बढ़ाया।

“मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया। ओम जय…”
ऋषि भृगु के वंशज, आपकी प्रसिद्धि तीनों लोकों में फैली हुई है। आपकी जय हो.

“कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।”
आप पवित्र धागा और जनेऊ पहनते हैं, आपके गले में रुद्राक्ष की माला शोभा देती है।

“चरण खड़ाऊं शोभे, तिलक त्रिपुंड भला। ओम…”
आपके पैर लकड़ी के सैंडल से चमकते हैं, और आपके माथे पर त्रिपुंड तिलक लगा हुआ है।

“तम्र स्याम घन केशा, शीश जाता
आपके काले तांबे जैसे बाल आपके सिर पर उलझे हुए बालों में लिपटे हुए हैं।

“सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी। ॐ…”
आप सज्जनों के लिए सुख का कारण और दुष्टों का नाश करने वाला तूफ़ान हैं।

“मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण
आपका चेहरा लाल रंग के साथ सूरज की तरह चमकता है।

“दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दीन रैना। ॐ…”
आप दिन-रात असहाय गौओं और ब्राह्मणों की रक्षा करते हैं।

“कर शोभित बर परशु, निगम-अगम
आपका हाथ कुल्हाड़ी से चमकता है, वेद और आगम आपके धर्मग्रंथ हैं।

“कंध चाप-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता। ॐ…”
आप ब्राह्मण वंश के रक्षक, धनुष, बाण और शंख धारण करते हैं।

“माता पिता तुम स्वामी, सखा से मिलो
आप ही माता-पिता और स्वामी हैं, सबके सच्चे मित्र हैं।

“मेरी बिरद सम्भारो, द्वार परा मैं तेरे।” ॐ…
मेरा सम्मान बनाए रखें, मैं आपके द्वार पर हूं। आपकी जय हो.

“अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो
इस आरती को ग्रहण करने वाले सनातन भगवान परशुराम हैं।

“पूर्णेन्दु” शिव सखी, सुख सम्पति पावे। ॐ…
भगवान शिव की साक्षी, सुख-संपत्ति प्रदान करती है। आपकी जय हो.

परशुराम जी: उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलू

परशुराम जी के बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण है। भारतीय पौराणिक कथाओं में परशुराम जी को भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में जाना जाता है। इनका जन्म त्रेतायुग के शुरू और सतयुग के अंत काल में हुआ था। इनके पिता का नाम ऋषि जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था।

परशुराम जी के बारे में बहुत सारी कथाएं हैं जो उनके जीवन को रोचक बनाती हैं। इन्होंने अपने जीवन में बहुत से विशेष उपलब्धियां हासिल कीं। ये एक अत्यंत शक्तिशाली ऋषि थे जिन्होंने अपनी जीवनी में धार्मिक एवं सामाजिक उत्थान को हमेशा अपना मुख्य लक्ष्य बनाया।

जन्म और बचपन

जन्म स्थल

भगवान परशुराम जी का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था। उनके पिता ब्राह्मण जमदग्नि तथा माता क्षत्रिय रेणुका थी। इसलिये उनके अंदर ब्राह्मण तथा क्षत्रिय दोनों के गुण थे। उनका जन्म स्थल के बारे में कुछ विवाद है। कुछ लोगों के अनुसार, उनका जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में हुआ था। जबकि कुछ लोगों के अनुसार, उनका जन्म केरल के चेंनई जिले में हुआ था।

बचपन की कहानियाँ

परशुराम जी के बचपन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण कहानियाँ हैं। उनका बचपन संगीत और वीणा बजाने में बीता था। उन्होंने अपने पिता से शस्त्र विद्या सीखी थी और उन्होंने इसमें बहुत माहिर हो गए थे। उन्होंने अपने शिक्षक से बहुत कुछ सीखा था और उन्होंने इसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उनके बचपन के दौरान कुछ घटनाएं भी हुईं थीं। एक बार उनके पिता ने उन्हें अपने शिष्यों के साथ शस्त्र विद्या का अभ्यास करते हुए पाया था। उन्होंने उन्हें देखते हुए उनके शिष्यों को धोखा दिया था। उन्होंने अपने पिता को बताया था और उनके पिता ने उन्हें इस बात के लिए धन्यवाद दिया था।

विशेष उपलब्धियाँ

क्षत्रियों का नाश

परशुराम जी, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं, के बारे में अनेक कथाएं सुनी जाती हैं। उनमें से एक कथा के अनुसार, वे क्षत्रियों का नाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लेकर आए थे। उन्होंने हैहय वंशी क्षत्रियों को 21 बार मार डाला था और इससे पृथ्वी पर शांति की स्थापना हुई थी।

भूमि का उत्खनन

परशुराम जी भगवान शिव के भक्त थे और उन्हें उनके शिष्य माना जाता था। उन्होंने भूमि के उत्खनन का काम भी किया था। उन्होंने सहस्रार्जुन नामक राजा के साथ युद्ध किया था और उस युद्ध में उन्होंने अपने परम शिव के आशीर्वाद से ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया था। इससे भूमि के उत्खनन से अनेक समस्याएं सुलझ गई थीं।

परशुराम जी के अनेक उपलब्धियों में से कुछ उपरोक्त उपलब्धियां थीं। उन्होंने अपने जीवन के दौरान धर्म के प्रचार-प्रसार का काम भी किया था और उन्हें भगवान विष्णु के अवतार के रूप में जाना जाता है।

शिक्षा और गुरु

परशुराम जी को शास्त्रों की शिक्षा दादा ऋचीक, पिता जमदग्नि तथा शस्त्र चलाने की शिक्षा अपने पिता के मामा राजर्षि विश्वमित्र और भगवान शंकर से मिली थी।

गुरु विश्वमित्र ने उन्हें अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान दिया था। उन्होंने उन्हें धनुर्विद्या की भी शिक्षा दी थी। परशुराम जी को अपने गुरु के शिष्यों में सबसे उत्कृष्ट माना जाता था।

भगवान परशुराम के गुरु स्वयं महादेव शंकर थे। वे भगवान शंकर के परम भक्त थे और उन्होंने शंकर जी को तप से प्रसन्न कर उनसे शास्त्रों और युद्ध की शिक्षा प्राप्त की थी।

परशुराम जी ने अपने शिष्य भीष्म को भी विभिन्न प्रकार की अस्त्र शिक्षा दी थी। उन्होंने कर्ण को भी विभिन्न प्रकार कि अस्त्र शिक्षा दी थी और उनका यह ज्ञान कर्ण को महाभारत युद्ध में बहुत मददगार साबित हुआ था।

परशुराम जी ने अपने जीवन में अनेकों शिष्यों को शिक्षा दी थी और उन्हें अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान प्रदान किया था। उनके शिष्यों में से एक थे भगवान रामचंद्र जी, जिन्होंने उनसे धनुर्विद्या की शिक्षा प्राप्त की थी।

इस तरह परशुराम जी को उनके गुरुओं ने अस्त्र-शस्त्र के ज्ञान के साथ-साथ धर्म का भी ज्ञान दिया था।

धार्मिक महत्व

व्रत और त्योहार

परशुराम जी के विभिन्न व्रत और त्योहार भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण हैं। उनकी जयंती को “परशुराम जयंती” के नाम से मनाया जाता है। यह त्योहार वैष्णव समुदाय में बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन लोग पूजा और भजन करते हैं। इसके अलावा, परशुराम जी के व्रत जैसे अक्षय तृतीया व्रत, शुक्ल पक्ष की एकादशी व्रत, नवरात्रि व्रत आदि भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।

मंदिर

परशुराम जी के नाम पर बहुत से मंदिर भारत भर में हैं। सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है सोहनाग परशुराम धाम मंदिर। यह मंदिर उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण परशुराम जी के तपस्या स्थल के रूप में किया गया था। इस मंदिर में भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित है।

दूसरे मंदिरों में से एक है रामेश्वरम मंदिर जो तमिलनाडु में स्थित है। इस मंदिर में भी परशुराम जी की मूर्ति स्थापित है। इसके अलावा, बहुत से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में भी परशुराम जी के मंदिर हैं।

इस प्रकार परशुराम जी के व्रत, त्योहार और मंदिर भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण हैं।

परशुराम की प्रेरणा

परशुराम जी भगवान विष्णु के आवतार माने जाते हैं और उन्हें धनुर्वेद का ज्ञान था। उनके जीवन में कई महत्वपूर्ण घटनाएं थीं, जो लोगों को उनकी प्रेरणा देती हैं।

परशुराम जी के जीवन से सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता ऋषि जमदग्नि थे। ऋषि जमदग्नि एक प्रतिष्ठित ऋषि थे और उन्होंने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। वे धर्म के प्रचारक थे और लोगों को धर्म के महत्व के बारे में बताते थे। ऋषि जमदग्नि ने अपने छोटे पुत्र परशुराम को धनुर्वेद का ज्ञान दिया था। उन्होंने अपने पुत्र को अपने जैसा बनाने के लिए उसे धनुर्वेद का ज्ञान दिया था।

परशुराम जी की दूसरी प्रेरणा उनके दादा ऋषि रिचिक थे। ऋषि रिचिक भी एक प्रतिष्ठित ऋषि थे और वे भी धर्म के प्रचारक थे। ऋषि रिचिक ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए थे। उन्होंने अपने पुत्र जमदग्नि को अपने जैसा बनाने के लिए उन्हें धनुर्वेद का ज्ञान दिया था। ऋषि रिचिक ने भगवान वरुण की यज्ञ में दान दिया था जिससे उन्हें एक अति शोभन घोड़ा मिला था। परशुराम जी ने अपने दादा के जीवन से बहुत कुछ सीखा था।

महत्वपूर्ण तथ्य

परशुराम जी हिंदू धर्म के सबसे प्रख्यात और विविध अवतारों में से एक हैं। उन्हें भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा, उन्हें भगवान शिव के शिष्य और रामायण के कुछ भागों में भी उल्लेख किया गया है।

परशुराम जी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं, जो निम्नलिखित हैं।

  • परशुराम जी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘परशु’ और ‘राम’। इनका अर्थ होता है, कुल्हाड़ी के साथ राम।
  • उनका मूल नाम राम था, परन्तु जब भगवान शिव ने उन्हें अपना परशु नामक अस्त्र प्रदान किया, तो उनका नाम परशुराम हो गया।
  • परशुराम जी एक ऐसे व्यक्ति थे जो जीवनभर तपस्या में रहते थे। उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु और शिव से अनेक वरदान प्राप्त किए थे।
  • उन्होंने अपनी कुल्हाड़ी का उपयोग करके अनेक राजाओं को मार डाला था। इसलिए उन्हें ‘क्षत्रियों का विनाशकारी’ भी कहा जाता है।
  • परशुराम जी को अमर बनाने वाली कोई वरदान नहीं मिला था। इसलिए उन्हें भी मृत्यु का सामना करना पड़ा था।

ये थे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य परशुराम जी के बारे में। उन्हें हिंदू धर्म के इतिहास में एक बड़ा स्थान मिलता है।

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