🪔श्री राधाकृष्ण जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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श्री राधाकृष्ण जी की आरती (हिंदी) –

आरती - १ 

ॐ जय श्री राधा, जय श्री कृष्ण,
श्रीराधाकृष्णाय नमः।।

चंद्रमुखी चंचल चितचोरी। (राधा)
सुघर सांवरा सूरत भोरी।। (कृष्ण)
श्यामा श्याम एक सी जोरी। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

पचरंग चूनर केसर क्यारी। (राधा)
पट पीताम्बर कामर कारी।। (कृष्ण)
एकरूप अनुपम छवि प्यारी। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

चंद्र चन्द्रिका चमचम चमके। (राधा)
मोर मुकुट सिर दमदम दमके।। (कृष्ण)
युगल प्रेम रस झमझम झमके। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

कस्तूरी कुमकुम जुत बिंदा। (राधा)
चंदन चारु तिलक बृज चंदा।। (कृष्ण)
सुहृद लाड़ली लाल सुनंदा। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

घूमघुमारो घांघर सोहे। (राधा)
कटिकछनी कमलापति सोहे।। (कृष्ण)
कमलासन सुर मुनि मन मोहे। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

रत्नजड़ित आभूषण सुंदर। (राधा)
कौस्तुभमणि कमलांकित नटवर।। (कृष्ण)
रणत्क्कणत मुरली ध्वनि मनहर। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

मंद हँसन मतवारे नैना। (राधा)
मनमोहन मन हारे सैना।। (कृष्ण)
मृदु मुसुकावनि मीठे बैना। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

श्रीराधा भव बाधा हारी। (राधा)
संकट मोचन कृष्ण मुरारी।। (कृष्ण)
एक शक्ति एकहि आधारी। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

जगज्योति जगजननी माता। (राधा)
जगजीवन जग-पितु जग-दाता।। (कृष्ण)
जगदाधार जगद्विख्याता। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

राधा राधा कृष्ण कन्हैया। (राधा)
भव भय सागर पार लगैया।। (कृष्ण)
मंगल मूरति मोक्ष करैया। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

सर्वेश्वरी सर्व दुःख दाहन। (राधा)
त्रिभुवनपति, त्रयताप नसावन।। (कृष्ण)
परम देवी, परमेश्वर पावन। (राधाकृष्ण)
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

त्रिसमय युगलचरण चित ध्यावे।
सो नर जगत परमपद पावे।।
राधाकृष्ण छैल मन भावे।
श्रीराधाकृष्णाय नमः…

आरती - २ 

ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण श्री राधा कृष्णाय नम: ||

घूम घुमारो घामर सोहे जय श्री राधा
पट पीताम्बर मुनि मन मोहे जय श्री कृष्ण
जुगल प्रेम रस झम झम झमके
श्री राधा कृष्णाय नमः ||

राधा राधा कृष्ण कन्हेया जय श्री राधा
भव भव सागर पार लगैया जय श्री कृष्णा
मंगल मूर्ति मोक्ष करैया
श्री राधा कृष्णाय नम: ||

🪔श्री राधाकृष्ण जी की आरती (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Ji Ki Aarti, Hindi (English Lyrics) –

Aarti - 1

Om Jai Shri Radha, Jai Shri Krishna,
Shri Radhakrishnaya Namah.

Chandramukhi chanchal chitchori. (Radha)
Sughar sanwara surat bhorii. (Krishna)
Shyama shyam ek si jori. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Pachrang chunar kesar kyari. (Radha)
Pat pitambar kamar karii. (Krishna)
Ekrup anupam chhavi pyaari. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Chand chandrika chamcham chamke. (Radha)
Mor mukut sir damdam damke. (Krishna)
Yugal prem ras jham jham jhamke. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Kasturi kumkum jut binda. (Radha)
Chandan charu tilak brij chanda. (Krishna)
Suhrid ladhli lal sundanda. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Ghoomghumaro ghaghar sohe. (Radha)
Katkachni kamalapati sohe. (Krishna)
Kamalasan sur muni man mohe. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Ratnjadit abhooshan sundar. (Radha)
Kaustubhamani kamalankit natvar. (Krishna)
Ranatkkanat murali dhvani manahar. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Mand hansan matware naina. (Radha)
Manmohan man hare saina. (Krishna)
Mridu musukavani meethe baina. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Shri Radha bhav badha haari. (Radha)
Sankat mochan Krishna muraari. (Krishna)
Ek shakti ekahi aadhaari. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Jagjyoti jagjanani mata. (Radha)
Jagjeevan jag-pitu jag-data. (Krishna)
Jagadadhar jagadvikhyata. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Radha Radha Krishna Kanhaiya. (Radha)
Bhav bhay saagar paar lagaiya. (Krishna)
Mangal moorti moksh karaiya. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Sarveshwari sarv dukh daahan. (Radha)
TriBhuvanpati, Trayatap nasavan. (Krishna)
Param devi, Parmeshvar paavan. (Radhakrishna)
Shri Radhakrishnaya Namah…

Trisamay yugalcharan chit dhyaave.
So nar jagat parampad paave.
Radhakrishn chhail mann bhaave.
Shri Radhakrishnaya Namah…

Aarti - 2

Om Jai Shri Radha Jai Shri Krishna Shri Radha Krishnaya Namah ||

Ghoom ghumaro ghamar sohe Jai Shri Radha
Pat pitambar muni man mohe Jai Shri Krishna
Jugal prem ras jham jham jhamke
Shri Radha Krishnaya Namah ||

Radha Radha Krishna Kanheya Jai Shri Radha
Bhav bhav saagar paar lagaiya Jai Shri Krishna
Mangal moorti moksh karaiya
Shri Radha Krishnaya Namah ||

https://shriaarti.in/

श्री राधाकृष्ण जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी & English –

Om Jai Shri Radha, Jai Shri Krishna, Jai Shri Radha Krishna Jai.

Radha with the charming face, who steals hearts.

Krishna, the beautiful, charming morning light with the melodious flute.

Radha and Krishna, a perfect and united couple.

I bow to Sri Radha Krishna, who wears yellow silk saree and has saffron tika on his forehead.

Wrapped in silk cloth around the waist, Krishna wore peacock feathers on his head.

Divine love shines between Radha and Krishna.

I bow to Shri Radha Krishna, whose forehead is adorned with musk and vermilion.

Krishna, charming in blue, with sandalwood paste on his beautiful forehead.

Radha’s soft smile mesmerises, while Krishna’s enchanting flute mesmerises.

The nectar of their mutual love sparkles and mesmerises.

I bow to Sri Radha Krishna, whose divine form is adorned with precious gems.

Krishna wearing the Kaustubha gem, the most attractive actor in Vrindavan.

The melodious sound of Krishna’s flute captivates the mind.

I bow to Sri Radha Krishna, whose eyes are mesmerizing and intoxicating.

Krishna, the charmer who steals hearts.

With a sweet and gentle smile, he shoots the arrow of love.

I bow to Sri Radha Krishna, who removes worldly obstacles and sorrows.

Krishna, the liberator, the destroyer of all troubles and troubles.

The ultimate power, the only support.

I bow to Sri Radha Krishna, the divine mother of the universe.

Life force, father and giver of the world.

The basis of the universe, famous in all the three worlds.

I bow to the divine couple Shri Radha Krishna.

Radha, Radha, Krishna Kanhaiya.

Crossing the ocean of worldly fears and troubles.

The one who brings auspiciousness and gives liberation.

I bow to the Supreme Purifier Shri Radha Krishna.

Meditate on the beautiful feet of the divine couple.

One attains the highest state of liberation.

May the divine love of Radha Krishna delight the mind.

I bow to Shri Radhakrishna.

श्री राधाकृष्ण जी की आरती का सरल भावार्थ हिंदी –

ॐ जय श्री राधा, जय श्री कृष्ण, जय श्री राधा कृष्ण जय।

आकर्षक चेहरे वाली राधा, जो दिल चुरा लेती है।

कृष्ण, मधुर बांसुरी के साथ सुंदर, सुबह की आकर्षक रोशनी।

राधा और कृष्ण, एक आदर्श और एकजुट जोड़े।

मैं श्री राधा कृष्ण को प्रणाम करता हूं, जो पीली रेशमी साड़ी पहनते हैं और माथे पर केसर का टीका लगाते हैं।

कमर पर रेशमी वस्त्र लपेटे, सिर पर मोर पंख धारण किए कृष्ण।

राधा और कृष्ण के बीच दिव्य प्रेम चमकता है।

मैं श्री राधा कृष्ण को प्रणाम करता हूँ, जिनका माथा कस्तूरी और सिन्दूर से सुशोभित है।

कृष्ण, अपने सुंदर माथे पर चंदन का लेप लगाए हुए, नीले रंग का मनमोहक।

राधा की मंद मुस्कान मंत्रमुग्ध कर देती है, जबकि कृष्ण की मनमोहक बांसुरी मंत्रमुग्ध कर देती है।

उनके आपसी प्रेम का अमृत जगमगाता और मंत्रमुग्ध कर देता है।

मैं श्री राधा कृष्ण को प्रणाम करता हूं, जिनका दिव्य रूप बहुमूल्य रत्नों से सुशोभित है।

कौस्तुभ मणि धारण करने वाले कृष्ण, वृन्दावन के सबसे आकर्षक अभिनेता।

कृष्ण की बांसुरी की मधुर ध्वनि मन को मोह लेती है।

मैं श्री राधा कृष्ण को प्रणाम करता हूं, जिनकी आंखें मंत्रमुग्ध करने वाली और नशीली हैं।

कृष्ण, मनमोहक जो दिल चुरा लेता है।

मधुर और सौम्य मुस्कान के साथ, वह प्यार का तीर चलाता है।

मैं श्री राधा कृष्ण को नमस्कार करता हूं, जो सांसारिक बाधाओं और दुखों को दूर करते हैं।

कृष्ण, मुक्तिदाता, सभी संकटों और परेशानियों का नाश करने वाले।

परम शक्ति, एकमात्र सहारा।

मैं ब्रह्मांड की दिव्य माता श्री राधा कृष्ण को नमन करता हूं।

प्राणशक्ति, पिता और जगत् का दाता।

ब्रह्माण्ड का आधार, तीनों लोकों में विख्यात।

मैं दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण को नमन करता हूँ।

राधा, राधा, कृष्ण कन्हैया.

सांसारिक भय और संकटों के सागर को पार करना।

शुभता लाने वाली और मुक्ति प्रदान करने वाली।

मैं परम पवित्रकर्ता श्री राधा कृष्ण को नमस्कार करता हूँ।

दिव्य युगल के सुंदर चरणों का ध्यान करें।

व्यक्ति मुक्ति की उच्चतम अवस्था को प्राप्त करता है।

राधा कृष्ण का दिव्य प्रेम मन को प्रसन्न करे।

मैं श्री राधाकृष्ण को प्रणाम करता हूँ।

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महत्वपूर्ण प्रश्न –

लक्ष्मी ने राधा जी को श्राप क्यों दिया?

लक्ष्मी ने राधा जी को श्राप क्यों दिया, इसका कारण पुराणों में विभिन्न रूपों में वर्णित है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक दिन राधा और लक्ष्मी में भगवान विष्णु के विषय पर विवाद हुआ। राधा ने कहा कि विष्णु उनके पति हैं और उन्हें विष्राम के लिए शांतिपूर्वक बुलाना चाहिए। वहीं लक्ष्मी ने अपने पति को विभिन्न लक्ष्मी-रूपों में पूजा जाने के लिए कहा। इस विवाद के चलते दोनों में तनाव बढ़ा और लक्ष्मी ने राधा को क्रोध में शाप देने का निर्णय किया।
उस श्राप के अनुसार, राधा को मृदंग (इक तरह का वाद्ययंत्र) के रूप में अवतारित होना पड़ा। इससे राधा विष्णु के समीप नहीं जा सकती थी और सिर्फ उनके ध्वनि का सुनने के लिए ही तैयार रह सकती थीं। इस प्रकार, उन्हें विष्णु से दूर रहने का दुःख झेलना पड़ा।
यह कथा पद्म पुराण और विष्णु पुराण में प्रमुख रूप से प्रस्तुत होती है। विभिन्न पुराणों और क्षेत्रीय कथाओं में यह कथा थोड़ी-बहुत भिन्न-भिन्न रूपों में प्रस्तुत की जा सकती है।

श्री कृष्ण की बांसुरी का क्या हुआ?

श्री कृष्ण की बांसुरी के बारे में कई प्रसिद्ध कथाएँ प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, श्री कृष्ण एक दिन बांसुरी बजाते हुए गोपियों के साथ वृंदावन के क्षेत्र में खेल रहे थे। उनकी मधुर मुरली की ध्वनि अद्भुत रसभरी थी और सभी गोपियाँ उनके वीणा के स्वर सुनकर प्रभावित हो रही थीं।
तभी एक राक्षस व्रकासुर (Vrakasura) नामक भयंकर दानव पास से गुजर रहा था और उसने श्री कृष्ण की बांसुरी की खूबसूरत ध्वनि को सुना। व्रकासुर ने कालजयी शक्ति से प्रभावित होकर कृष्ण से यह अपेक्षा की कि वह उसे अपनी बांसुरी दे दें। अगर कृष्ण ने इसे इनकार किया तो व्रकासुर ध्वनि को दुर्गुण के लिए बदलने की कला रखता था और उसने सोचा कि यदि वह इस ध्वनि की सारी शक्ति प्राप्त कर लेता है, तो वह असुर लोक को वश में कर सकता है।
कृष्ण ने अपने विवेक से बांसुरी को व्रकासुर को नहीं देने का निर्णय किया। तभी वह एक योजना बनाई, उन्होंने व्रकासुर को कहा कि वह सबसे पहले ध्वनि को अपने सिर पर रखकर नचना सीखे। जैसे ही व्रकासुर ध्वनि को अपने सिर पर रखा, कृष्ण ने जल्दी से उसे गला घोंट दिया। व्रकासुर की मृत्यु हो गई और उसका दानवी शरीर धूल में मिल गया।
इस प्रकार, श्री कृष्ण ने बांसुरी को अपने सुरक्षा के लिए ध्वजवाहक और रक्षक के रूप में उपयोग किया। श्री कृष्ण की इस बांसुरी की ध्वनि आज भी हिंदुओं के लिए आध्यात्मिकता और सार्थकता का प्रतीक है।

भागवत पुराण में राधा का नाम क्यों नहीं है?

भागवत पुराण एक महत्वपूर्ण हिंदू पुराण है, जिसमें विष्णु भगवान के अवतारों और कृष्ण के जीवन का विवरण दिया गया है। हालांकि, भागवत पुराण में राधा का नाम नहीं उल्लेखित है। राधा की उपस्थिति भागवत पुराण में सीमित है और यह उसके कथानकों में सर्वाधिक विस्तार से नहीं दिखाई गई है।
कुछ विद्वानों का मानना है कि भागवत पुराण में राधा का उल्लेख नहीं है क्योंकि यह पुराण प्राचीन काल में लिखा गया था और उस समय राधा की कथा का प्रचलन अधिक नहीं था। इसके बजाय, इस पुराण में कृष्ण के भक्तों की भक्ति और प्रेम का महत्वपूर्ण वर्णन किया गया है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राधा की कथा और महिमा अन्य हिंदू पुराणों जैसे विष्णु पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, पद्म पुराण, गरुड़ पुराण, वामन पुराण आदि में प्रायः पाई जाती है। राधा कृष्ण की भक्ति और प्रेम की प्रस्तुति उन पुराणों में विस्तृत रूप से मिलती है।


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